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हिंदी: भारत को सशक्त और समृद्ध बनाने की शक्ति

हिंदी: भारत को जोड़ने, ज्ञान-विज्ञान फैलाने और जनसामान्य को सशक्त बनाने की शक्ति भारत की वास्तविक प्रगति का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब देश के विकास का लाभ केवल कुछ शिक्षित, साधन-संपन्न और विशेष भाषायी सुविधाओं वाले लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के सामान्य नागरिक तक पहुँचे। इसके लिए आवश्यक है कि ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, रोजगार और व्यापार के अवसर आम लोगों की समझ में आने वाली भाषाओं में उपलब्ध हों। इस दिशा में हिंदी की भूमिका पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। भाषा विभाजन का नहीं, संवाद का माध्यम बने भारत अनेक भाषाओं और संस्कृतियों का देश है। प्रत्येक भारतीय भाषा हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन जब भाषाओं को एक-दूसरे का विरोधी बताकर प्रस्तुत किया जाता है, तब भाषायी विविधता के प्रति सम्मान की जगह अविश्वास और विभाजन पैदा हो सकता है। भाषायी विवादों से सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को हो सकता है जिनके पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आर्थिक संसाधनों और रोजगार के अवसरों तक पहले से ही सीमित पहुँच है। अंग्रेजी में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों को अनेक उच्च शिक्ष...