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मित्र पर कविता

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मित्र
जिन्हें हम मित्र समझे हैं,                              
बहुत खामोश रहते हैं,
मालूम नहीं वे!
खुश या नाराज़ होते हैं,
हम तो अपनों को
शुभ प्रभात कहते हैं।

भक्ति आंदोलन और प्रमुख कवि

भक्ति आंदोलन औरप्रमुख कवि
भक्ति आंदोलन का आरंभ 14वीं सदी के मध्यसे 16वीं सदी के मध्य तक माना जाता है। प्रायःविद्वान आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कालविभाजन की सीमारेखा से सहमत है जिसे उन्होंने सन ‘1318 ई से 1643’1 ई. तक माना है। इस समय सीमा कोइतिहासमेंपूर्व मध्यकाल के रूप में जाना जाता है। हिंदी साहित्य में इस काल को भक्तिकाल अथवा भक्तियुग के नाम से जानते हैं। इस भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग भी कहा जाता है क्योंकि इस काल में हिंदी साहित्य के काव्य की श्रेष्ठ रचनाएं की गईं और श्रेष्ठ कवियों का अवतरण हुआ। आंदोलन हो या काव्य प्रवृतियां सबके उद्भव के कुछ प्रेरणा-श्रोत होते हैं। माना जाता है कि भक्ति आंदोलन का उद्भव दक्षिण में आलवारों तथा नायनार संतो द्वारा छठीं से नौवीं शतीके बीच हुआ। आलवार संत विष्णु के भक्त थे तथा नायनार संत शिव की आराधनाकरते थे। ये संत अधिकांशतः गैर ब्राह्मण जातियों में पैदा हुए थे और पौराणिक शास्त्रीय ज्ञानकी अपेक्षाअनुभव ज्ञान को ज्यादा महत्त्व देते थे। चूंकिगुप्तसाम्राज्य के पतनके बाददेश में छोटे-छोटे राजाओं की बाढ़ आ गई थी। उनमें से अधिकाश पैत्रिक राजपरिवार की …

कहते हैं डर के आगे जीत है

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माता वैष्णव देवी के दर्शन करने के मार्ग पर लगभग पांच सौ मीटर से अधिक ऊंचाई पर बने इस घर के आस पास कैसे बकरी निडर हो कर घूम रही थी। जहां से नीचे देखने पर सामान्य आदमियों के पैर फिसल रहे थे।

क्या उन लोगों से ज्यादा बहादूर नहीं है जो इसे मारते हैं या निरीह आदमियों की हत्या करते हैं। क्या भगवान , गॉड और अल्ला ने इस बकरी और उस आदमी दोनों को नहीं बनाया है। किंतु जब बकरी आदमी को नहीं मारती तो फिर आदमी क्यों बकरी को मारता है? सोचें अगर आप की कोई बकरी हत्या करती और कहती सर्वोच्च शक्ति की इच्छानुसार हो रहा है तो आप को कैसा लगता। अतः इस सुंदर ग्रह की सुंदरता की रक्षा करें और बर्बरता से सभ्यता की ओर बढ़े। यही इस बहदूर बकरी का संदेश है।
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श्रीनगर की यात्रा के दौरान काश्मीर की डल झील में शिकारा का आनंद लेते हुए मेरे परिवार के आधे सदस्य-


काश्मीर भारत का अभिन्न अंग , इसका सौंदर्य भारत का सौंदर्य है, यहां जो असामान्य बात लगी वह यह की यहां स्थानीय औरते घरों में प्रायः बंद रहती हैं। काश! वे भी इसका अंग होतीं?

जनमार्ग के रोड़े

हमेशा देखता आ रहा हूँ कि काम कोई कर रहा है और चालबाज उसका हिस्सा खाए जा रहे हैं और काम करने वाले पता भी चल रहा है कि उसका सबसे बड़ा अहित साधक, उससे इर्ष्या करने वाला, झूठा हमसफर बन उसके साथ चलता जा रहा है--- अब उसका असली चेहरा मेरे सामने है और उसे आप भी देखें-----
जनमार्ग के रोड़े

हमारे देश में,
कुछ ऐसे तत्व हैं,
जो खाते तो इस देश के हैं,
पर गाते परदेश के हैं,
बनना चाहते हैं,
नेता यहां के काली, भूरी जनता के,
पर सदा साथ देते हैं-
शोषकों और शोषण अस्त्रों को,
कभी-कभी शर्म करते हैं,
जनता की बोली बोलने में,
उनके संग ऊंचे मंचों पर बैठने में,
बताते हैं,
लोगों को अपने से छोटा।
गलत और स्वार्थी रास्तों से
रोकते हैं, लोगों का विकास मार्ग
घोषित करते हैं खुद से,
खुद को,
वे हैं,
विकसित सरताज,
चाहते हैं,
बना रहे अंधविश्वास,
बना रहे अविज्ञान का वास,
ताकि
सुरक्षित रहे,
उनके सर का ताज।
इन्हीं खोटो ने
बुलाया देश के,
दुश्मनों को हर बार,
करने के लिए सुरक्षित खुद का ताज।
भेद-भाव बढ़ाते, खुद को विशिष्ट कहाते,
बढ़ाते पीड़ा और संताप,
खाते गरीब जनता के रक्त पसीने का परताप
हिस्सा और हक़ खाने के लिए
गरीबों का,

वसंत में होली उत्सव

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भारत दुनियां का सर्वोत्तम देश  है। जानते हैं क्यों? क्योंकि अभी होली अर्थात वसंतोत्सव का मौसम पूरे भारत में चल रहा है। देश के हजारों लाख नर नारी इस त्योहार का इंतजार करते रहते हैं। जब यह त्योहार मनाया जाता है तो सभी नागरिक रंगों में डूब जाते हैं। पूरे देश में प्रेम और रंग की रंगोेलियां बिछ जाती हैं। क्या स्कूल क्या कॉलेज, क्या बाजार, क्या गांव, शहर सब जगह रंगों का फाग खेलते हुए देख सकते हैं। यह मूलत: भारत का ऐसा त्योहार हैं जिसमें बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को रंगीन बना देता है। सब के लिए इस त्योहार में जगह है। जहाँ बालक और किशोर इस रंगबिरंगे त्योहार का रंगात्मक आनंनद में डूबे रहते हैं। वहीं युवा अपने जोड़ों की खोज करते हैं।  गृहस्थ और वृद्ध अपने सपनों को सकार कर के रसों की चसकी लेते हैं। होली अत्यंत सुंदर और पूर्ण वैज्ञानिक  हर्सोल्लास का त्योहर है। देश के अन्य प्रांतों में यह त्योहार बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। संपूर्ण उत्तर भारत, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा तो मानों इस त्योहार में रंगों से सराबोर हो जाते हैं। यह त्योहार कर्नाटक और केरल के लोगों नव उत्साह पैदा करता है। तेलंगाना, आं…

छोटी छोटी बातें

छोटी छोटी बातें
कल अचानकआदित्य गांवकर के जोड़ों मेंकुछहलचल हो गई। बेचारा बेतहासा भाग रहा था कि उसका हाउस प्रथमया द्वितीय रैंक में आ जाय। किंतुकमर के जोड़ों में दूसरे राउंड के दौरान चटकन आई और बाएं पैर की हड्डी सरक गई। बेचारा मैदान में ही चिल्ला कर गिर पड़ा। थोड़ी देर तक किसी कोसमझ में नहींआया कि क्या हुआ? उस दौड़ की समाप्ति पर उसके साथी लड़के दौड़ कर उसके पास गए तो पता चला उसको बहुत ज्याद पीड़ा हो रही है। यह घटनादिनांक 28 फरवरी 2015 दिन शनिवार की शाम 6.45 की है, जब जवाहर नवोदय विद्यालय काणकोण दक्षिण गोवा मेंअंतर हाउस एथलेटिक प्रतियोगिता संपन्न हो रही थी। पीटी सर औरअन्यअध्यापकसूचना उसके हाउस मास्टर के पास भेज दिया। सूचना प्राचार्य और अन्य संबंधित लोगों तक भी पहुंची पर क्या हुआ? कौन उसे हास्पिटल ले जाय? नर्स मैडम की जिम्मेदीरी होती है बच्चों के मेडिकल समस्याओं की देख-रेख करना, परंतु वह भी संडे की छुट्टी पर थीं। समस्या गंभीर थी, आप सोच रहे होंगे कि वहां सभी लोग संवेदनहीन हैं पर बात ऐसी नहीं है। दिनभर कार्यकरने के पश्चात वही दो-तीन घंटे मिलता है जिसमेंलोग अपना घरेलूकाम करते हैं। उसमें भीप्र…

वैज्ञानिक और प्रगतिशील कदम : अखिलेश यादव उ.प्र. सरकार

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यूपी की अखिलेश यादव सरकार अंतरजातीयविवाहकरने वालों को पुरस्कृत कर रही है। यूपी सरकार की योजना के तहत दूसरी जातिसे शादी करने वाले लोगों को 50,000 रुपये,एक मेडल तथा एक सर्टिफिकेट देने का प्रावधान है। मेरठ के ऐसे कई जोड़ों को सरकार सम्मानित करने जा रही है।

Uttar Pradesh Akhilesh Yadav government is rewarding those peoplehavedoneintercaste marriage. Under the plan of Uttar Pradesh government that who will marriage othere caste (race) will be awarded by 50,000 thousand cash, one Medal and a certificate by government side.
अरे भाई क्या बात है बेरोजगारी में रोजगार का उपाय  और साथ में समाज सुधार का जश कितान अच्छा है बस।

बोर्डिंग स्कूल का पहला दिन

आज मेरा पहलादिन है। मैं बहुतखुश हूँ क्योंकि मैं न केवल अपने सपने को सफल होता देख रही हूँ। बल्कि आज मैं अपने पापा की नजरमेंएक होनहार और सबसे अच्छी बेटी बन गई हूँ। मुझे नवोदय विद्यालय की प्रवेशपरीक्षापास करने की उतनी खुशीनहीं है जितनी की मेरे परिवार को है। शायद मेरे पालकों को मेरी सफलता में ही खुशी मिलती है। छोड़ो...... इन ... बातों को.......। ऐसा ही मैं सोच रही थी जब नवोदय विद्याल में पढ़ने हेतु पहली बार आई थी। सभी छः में आए लड़के लड़कियाँ रो रहे थे किंतु मुझे ज्यादागमनहीं था। रातकोसदनाध्यापिका ने हम सभी छठवीं के लड़कियों को बेड दिए और सदन में रहने के नियम-कानून बताए। बहुत अच्छी थीं मैडम। सभी बच्चों की बातें बहुत प्यार से सुनतीं और तुरंत हमारी कोई भी उठी जिज्ञासाशांतकर देतीं, हमारी परेशानी का समाधान कर देतीं। सदनाध्यापिका ने कहा- पढ़ाई मजे से करो, खेलने में मजे करो, रहने में मजा करो, खुब मजा करो! पर ध्यान रहे, नियमों का पालनकरना और दूसरों को कष्टमत देना। अंजली बोली बस! इतना ही, मैंने सुना था बहुत कठिन होता है हॉस्टलों की जिंदगी। पर कहाँ से सुना था, बेटी! मैडम बोली। किंतु यहाँ कोई कष्ट न…

सारा की मुहब्बत

कहानी
गोवा के काणकोण तालुका मेंएकपरिवार रहता था, जिसमें तीन सदस्य थे। सबीह अली उसकी बेगम सारा और सारा की बहन सबी। सारा और सबी दोनों बहनों की पढ़ाई लिखाई नवोदय में होने के कारण वे खुले बिचारों तथाउच्च संस्कारों से संपन्न थीं। सबीह बंगलूरु से तालीम लिया है। सबीह और सारा के शादी हुए अभी एक महीना ही हुआ है। सबीह सारा तथा साली सबी के साथ रहता है। सारा को पशु-पक्षियों को पालने का बहुतशौक है, उसने बिल्ली, मुर्गा, मुर्गी और दो कबूतर पाल रखे हैं। वे अहाते में बाड़ा बना रखे हैं जिसमें नीचे मुर्गा, मुर्गी रहते हैं और ऊपर कबूतर ने बसेरा बनाया है। सारा सबेरे औरशाम आकर इन सबको खाना-पानी खिलाती-पिलाती है और उनके साथ अपना कुछ समय बिताती है। एकदिन उसने देखा कि कबूतर कबूतरी एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं, साथ - साथ गूंटूरगूं करते हैं, साथ में खाते हैं, साथ में पीते हैं, एक ही साथ खेलते और नाचते हैं। कबूतरों और उनके प्रेम को देखकर सारा को बहुत मजा आता वह अपनी बहन को इस पवित्र प्रेम को बताती और दिखाती। सारा अपने शौहर को बहुत मुहब्बत करती। वह सबीह को सदा साथ रखना चाहती। पक्षियों को खिलाने-पिलाने में सबीह …