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March, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कितना कोशिश कितना पानी

दोस्तों ब्लोग बनाने के लिए हमने कितनी कोशिश किया परंतु अभी भी सफलता नही मिल रही है.

तुम कितनी हसिन है
यह केवल मैं जनता हूँ,
लाख भाग ले हमसे,
हम तेरा साथ न छोड़ेगे,
लोग चाहते हैं पीना सूरूरी नशीली आंखें,
नही देख पाते सौम्य शीतन चितवन
कह दो उनसे तुम रोते हुए हँसता रह,
हमें तो सवन की बहार मिल गई है.

हिन्दी और अंग्रेजी तथा भारत

हिन्दी और अंग्रेजी तथा भारत
एक आलेख

वैश्वीकरण का युग है दुनिया एक गाँव में बदल रही है. भारत भी इस दुनिया का एक हिस्सा है अत: यह भी इस प्रक्रिया में सम्मिलित है परंतु भारत देश की जनसंख्या का बहुत ही कम हिस्सा इस खेल में सम्मिलित है जिसका अधिकतम प्रतिशत 10 से कम है जबकि भारत के साथ स्वतंत्र हुआ देश चीन सभी क्षेत्रों में हमसे बहुत आगे जा चुका है. इसका कारण क्या है? क्या इस देश के नीति-निर्माताओं ने सोचा? क्यों अभी तक हम आम नागरिकों को प्रगति की धारा से नहीं जोड़ पाए? ज़रा सोचें-विचारें- यदि हम दुनिया के विकसित और विकासशील देशों को वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो तीन वर्ग दिखाई देता है- 1.अमेरिका-यूरोप- अंग्रेजी अन्य निकटतम भाषा-भाषी
2.जापान-कोरिया-चीन-चित्रात्मक भाषा
3.भारत-दक्षिण एशिया- हिन्दी और अन्य भाषा-भाषी
1.अमेरिका-यूरोप- अंग्रेजी अन्य निकटतम भाषा-भाषी:
अमेरिका,कनाडा, इंगलैण्ड, फ्रंस, जर्मनी, इटली आदि देशों के नागरिकों के विकास के पिछे भिन्न-भिन्न कारण हैं अमेरिका ,कनाडा और आस्ट्रेलिया आव्रजित (माइग्रेटेड) जनसंख्या के देश हैं यहाँ बहुभाषा समूह नही…