जरुरत

कभी कभी आत्मा को इतना दर्द होता है
उसको बया करना खुद पे शर्म  होता है,
वो हमें सिखाते आधुनिकता की शैली,
जिसमें होता है जिस्म बेच कर जीने की कला
अपनी ही जनता को चूना लगाने की कला
एक इंच जमीन बढा न सके,
पर आजदी के नाम पर बेच देने की कला
 वे पढ़वाते हैं आत्महीनता का पाठ
जिसमें होता है नौकरी पाने की कला
बडे बडे आईआईटी और आईआईएम खोलो गए हैं,
शायद वहाँ सिखाया जाता है ....
देश को खाजाने की सबसे अच्छी कला
क्यों नहीं आजतक निकला इन श्रेष्ठ संस्थानों में कोई ऐसा
जो समझा हो इस देश की आवश्यकता ???
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