सहज को कठिन बनाने का प्रयास

           
कुछ लोग हिंदी में विदेशी शब्दों के शुद्धता के नाम पर अपरचित अरबी-फारसी या अंग्रेजी के शब्दों का जानबूझ कर प्रयोग करते हैं और सर्वग्राही होने का नाटक करते हैं। हिंदी में नुक्ता चिह्न लगाने की कोई आवश्कता नहीं है। क्योंकि जनता उसे, उसके मूल शाब्दिक शुद्धता से नहीं बोलती है। वही बात अंग्रेजी शब्दों पर भी लागू होती है। अंग्रेजी के शुद्ध उच्चारण के नाम पर हिंदी को अशुद्ध और कठिन करने में इन कथित हिंदी भाषा के दुश्मनों को शर्म नहीं आती है। अरे भाई हिंदी किसी शब्द को उसी प्रकार ग्रहण करेगी जैसा वह जनता में बोला जाता है। आप को परेशानी है तो जरा या ज़रा, कप या कप़, जलील या ज़लील शब्दों के दो अर्थ बता दीजिए। डॉक्टर केवल अंग्रेजी बोलने वाला बोलता है। आम जनता उसे डाक्टर ही बोलती है। उसी प्रकार लोक में जरा, कप और जलील ही प्रचलित है।
     अतः इसके देशी उच्चारण को ही हिंदी शब्द के रूप में ग्रहण करने की जरूरत है। ताकि कोई विदेशी हिंदी सिखे तो इन शब्दों का अर्थ शब्दकोश में प्राप्त कर सके। क्या अंग्रेजी भाषा ने 'दाल' को 'डाल' नहीं बना दिया है। हे मेरे हिंदी के शुभ चिन्तकों! कम से कम भाषा को राजनीति में मत डालों। बहुत अन्य समस्याएं हैं, उन्हें ठीक करो। हिंदुस्तानी का मतलब पहले ठीक से समझो। जिसका मतलब होता है, इस देश के आम लोग जिस रूप में भाषा बोलते है, वह रूप। यदि कोई भाषा किसी शब्द संपदा को ग्रहण करती है तो इसका मतलब यह नहीं होता कि वह अपनी प्रकृत में उस शब्द के शुद्ध उच्चारण हेतु बदलाव करे। बल्कि इसके विपरीत भाषा उस गृहीत शब्द को अपनी उच्चारण प्रकृत के अनुसार बदलती है जैसे- मुंबई को अंग्रेजी ने बंबई  और कोलकता को कल्कत्ता कर  लिया था। उसी प्रकार जरा, कप, और डाक्टर ही हिंदी के शब्द-संपदा बनने के योग्य हैं, न कि ज़रा, कप़ और डॉक्टर। जहाँ तक टीवी की बात है तो उसमें कथित अंग्रेजी के जानकार हिंदी की दुकान चाला रहें हैं। टीवी के वाक्यों में कई अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिसे हिंदुस्तानी भाषा का अच्छा जानकार भी नहीं समझ पाता है।
      अतः हिंदी को अरबी-फारसी या अंग्रेजी के अनावश्यक शब्दों और शुद्धता के नाम पर अप्रासंगिक करने की कोशिश कम से कम न किया जाय। सच में उसे हिंदी या हिंदुस्तानी रहने दिया जाय। हिंदी का मतलब हिंदू निकाल कर सेकुलरवादी न बने। हिंदी का अर्थ ही होता है- हिंदुस्तानी और हिंद का अर्थ है- हिंदुस्तान। अतः अपने अवैज्ञानिक तर्कों से हिंदी/हिंदुस्तानी को गलत व्याख्या कर उसे नष्ट न करें। कुछ इस भाषा की वृद्धि के लिए लिखें और लोक प्रचलित, जन प्रचलित शब्दों का प्रयोग करें। सच में हिंदी की सेवा करना चाहते हैं तो इंस्क्रिप्ट की बोर्ड से शिफ्ट ‘य़’ के स्थान पर ‘?’ रखवा दें या लोगों को बता दें कैसे बदला जा सकता है तो निश्चित रूप से हिंदी के आप शुभ चिंतक कहे जा सकते हैं।  

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भक्ति आंदोलन और प्रमुख कवि

मातृभाषा शिक्षण का माध्यम क्यों नहीं?

विश्वविख्यात पहलवान नरसिंह यादव के साथ धोखा क्यों?